Gold to Gold hota hai….Chora lawe ya Chori…..


by Sabah and Saima

dangal-dialogues
                        A Dialogue from Movie “Dangal”

       शायद हम सभी ने “दंगल “ फिल्म देखा होगा |इस फिल्म के बाद बोहोत सारे लोग इस से प्रेरित हुए होंगे …..पर ऐसी लड्कियौं की कहानिया बोहोत सालो से चल रही है | यह कहानी इस लिए सबके सामने आई क्युओंकी उन्होंने अपने देश का नाम रोशन किया …पर ऐसी कितनी लडकियों की कहानी है जो “चार दिवारी “ में  बंद रह जाती है|  शायद यह लडकियों की कहानी भी इसी तरह बंद रह जाती ,जब तक वोह अपने आप को किसी के काबिल नहीं समझती | इनके पिता ने उनको अपना सपना पूरा करने के लिए देश का नाम रोशन करने के लिए अपनी बेटियों को उस अखाड़े में धकेला जिसमे सिर्फ आदमी ही जा सकते है ऐसी सोच है समाज की…उनके दंगल लड़ने पर ,लड़के जैसे कपडे पेहेन्ने पर कई सवालों का सामना करना पढ़ा पर वोह लग रुके  नहीं और न ही उनके पिता रुके …वोह उनकी ढाल बन कर खड़े रहे  …पर असल ज़िन्दगी में ऐसी बोहोत सी लडकिया  है जो समाज के दबाव से ही अपने सपनो को कुचल देती है और समाज के साथ समझोता कर लेती है |

     पर दंगल फिल्म में जब दोनों लडकियां देश का नाम रोशन करती है तब समज उनको उनके लड़की होने का एहसास नहीं दिलाता…………..क्या ज़रूरी है के हमें हमारे देश का नाम रोशन करने पर ही समाज हमें हमारे हिसाब से चलने दे ? इसी तरह समाज हमारे देश के साथ साथ हमारे ज़िन्दगी में एक पहचान बन्ने दे ..तो शायद हमें अपने सपनो को कुचलने की ज़रूरत ना  पड़े |हमने तो यह ठान लिया है के हम लडकिया  भी अपनी पहचान बनाकर रहेंगे ,फिर चाहे उसमे वक़्त ही क्यों ना  लगे|

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